लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में गुरुवार को देश भर के 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 95 लोकसभा सीटों पर मतदान संपन्न हो गया है.
चुनाव आयोग के अनुसार, दूसरे चरण में मतदान औसतन 66 प्रतिशत रहा.
दूसरे चरण में असम, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सीटों पर मतदान हुए.
चुनाव आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि सर्वाधिक मतदान 78 प्रतिशत पुद्दुचेरी में हुआ.
आयोग के मुताबिक छह बजे तक, असम में 73.32, बिहार की पांच सीटों पर 62.52, छत्तीसगढ़ की तीन सीटों पर 71, जम्मू कश्मीर की दो सीटों पर 43.37, कर्नाटक की 14 सीटों पर 61.80, महाराष्ट्र की 10 सीटों पर 62, मणिपुर में 74.69, ओडिशा की 5 संसदीय सीटों और 35 विधानसभा सीटों पर 64, पुद्दुचेरी की एक सीट पर 78, तमिलनाडु की 38 सीटों पर 72, उत्तर प्रदेश की 8 सीटों पर 62.3 और पश्चिम बंगाल की तीन सीटों पर 75.27 प्रतिशत मतदान हुए.
ओडिशा के बाराहाला मतदान केंद्र के पास चरमपंथी हमले में एक चुनाव अधिकारी की मौत हो गई.
चुनाव आयोग ने एक नए ऐप्प 'वोटरटर्नआउट' की शुरुआत की घोषणा की है, जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है और राज्यवार, संसदीय क्षेत्रवार, या खास इलाके में मतदान के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
ईवीएम मशीन और वीवीपैट में गड़बड़ी के चलते ओडिशा के चार मतदान केंद्रों पर फिर से चुनाव कराए जाने का चुनाव आयोग ने आदेश दिया है.
ओडिशा के मुख्य चुनाव अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने सुंदरगढ़ में बूथ नंबर 213, बोनाई में बूथ नंबर 129 और डासपल्ला में बूथ नंबर 210 और 222 पर पुनर्मतदान का आदेश ज़ारी किया है.
दूसरे चरण के मतदान में तीन बजे तक महाराष्ट्र में 46.63%, तमिलनाडु में 52.02%, ओडिशा में 53%, मणिपुर में 67.5%, उत्तर प्रदेश में 50.39%, छत्तीसगढ़ में 59.72% और कर्नाटक में 49.26% मतदान हुआ.
असम में क़रीब 60.38% मतदान हुआ. यहां करीमगंज में 63.66%, सिलचर में 57.06%, ऑटोनोमस ज़िलों में 62.70%, मांगलडोई में 62.73% और नावगोंग में 56.78% मतदान हुआ.
लखनऊ से सपा-बसपा-आरएलडी उम्मीदवार के रूप में शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा ने नामांकन दाखिल करने के बाद रोड शो किया, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा और डिंपल यादव भी मौजूद रहे.
यहां से कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है जबकि शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर पटना साहिब से प्रत्याशी हैं.
लेकिन महागठबंधन की कैंडिडेट और अपनी पत्नी के रोड शो में आने पर कांग्रेस के उम्मीदवार आचार्य प्रमोद कृष्णम ने नाराज़गी ज़ाहिर की.
प्रमोद कृष्णम ने कहा, "शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी पत्नी के प्रचार में आकर पत्नी धर्म निभाया है, लेकिन मेरा कहना है कि वो मेरे लिए एक दिन प्रचार कर पार्टी धर्म भी निभाएं."
1 बजे तक मतदान प्रतिशत
चुनाव आयोग के अनुसार, 1 बजे तक मतदान का प्रतिशत मणिपुर में 49.7%, छत्तीसगढ़ में 47.92%, उत्तर प्रदेश में 39.24% और कर्नाटक में 36.31% रहा.
महाराष्ट्र में दोपहर 1 बजे तक 35.4 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में तीन लोकसभा सीटों पर 47 प्रतिशत मतदान हुआ था.
समाचार एजेंसी एएनआई ने गृह मंत्रालय के हवाले से कहा है कि बांग्लादेशी एक्टर ग़ाज़ी नूर को दमदम में एक राजनीतिक रैली में शामिल होने पर देश छोड़ने को कहा गया है.
उनके वीज़ा की अवधि समाप्त हो चुकी थी. नियत समय से अधिक रुकने के लिए उनपर कार्रवाई भी हो सकती है.
Friday, April 19, 2019
Monday, April 15, 2019
जम्मूः कठुआ के लोग आख़िर क्यों बीजेपी से नाराज़ हैं- ग्राउंड रिपोर्ट
देश भर में लोकसभा चुनाव के चलते जगह-जगह चहल-पहल नज़र आ रही है. कहीं सियासी पार्टियों के उम्मीदवारों के पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं तो कहीं चुनावी सभा की तैयारियां ज़ोरशोर से चल रही हैं.
चाय की दूकान हो, गाँव की चौपाल हो या फिर गली-मोहल्ला- हर जगह राजनीति सिर चढ़ कर बोल रही है.
लेकिन जम्मू के कठुआ जिले में पड़ने वाले रसाना और उसके आस पास के गांवों में आज भी सन्नाटा पसरा हुआ है.
दूसरे चरण का चुनाव प्रचार ख़त्म होने में सिर्फ तीन दिन बाकि हैं लेकिन अभी तक गाँव में चुनावी माहौल नज़र नहीं आ रहा.
हम गाँव के अन्दर कदम रखते हैं तो एक अजीब-सी ख़ामोशी हमारा स्वागत करती है.
पूरे गाँव में कहीं भी किसी दीवार पर कोई पोस्टर नहीं है, ना ही किसी नेता के आने की सुगबुगाहट की सुनाई देती है. न तो किसी उम्मीदवार ने अपना पोस्टर चिपकवाया है और न ही कोई नेता वोटरों को लुभाने के लिए गाँव का रुख कर रहा है.
यह गाँव -रसाना- उधमपुर-डोडा लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है. यहां लगभग 16.85 लाख मतदाता 18 अप्रैल को 12 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. ये लोकसभा सीट डोडा, किश्तवार और रामबन के अलावा कठुआ, उधमपुर और रियासी के जिलों तक फैली हुई है.
भाजपा की ओर से डॉ जीतेन्द्र सिंह दूसरी बार यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. रियासत में सदर-इ-रियासत रहे चुके डॉ करण सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के साझा उम्मीदवार के तौर पर यहां से उनके ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में डटे हुए हैं.
88 साल की उम्र में डॉ करण सिंह खुद अपने बेटे के लिए जनता के बीच जा कर वोट मांग रहे हैं.
डॉ करण सिंह ने खुद इस सीट पर 1967-1980 के बीच लगातार चार बार जीत हासिल कर लोगों का प्रतिनिधित्व किया है. अपनी हर चुनावी सभा में वो वोटर्स से 'डोगरा अस्मिता' के नाम पर वोट डालने की अपील कर रहे हैं.
डॉ जीतेन्द्र सिंह की राह मुश्किल बनाने के लिए भाजपा से नाराज़ बागी उम्मीदवार लाल सिंह भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.
13 अप्रैल 2018 के दिन उन्होंने मंत्री परिषद से त्यागपत्र दे दिया था और उसके बाद से वो जनता के बीच उनकी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.
वहीं डॉ जीतेन्द्र सिंह के ख़िलाफ़ जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथरस पार्टी के चेयरमैन हर्षदेव सिंह भी चुनाव मैदान में डटे हुए हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में डॉ जीतेन्द्र सिंह ने कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आज़ाद को 60,000 से ज्यादा वोटों से हराया था. लेकिन इस दफ़ा कठुआ जिले के लोगों की नाराज़गी डॉ जीतेन्द्र सिंह को महंगी पड़ सकती है.
डॉ सिंह की स्थिति मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद रविवार के दिन कठुआ में एक बड़ी चुनावी रैली संबोधित किया.
कठुआ जिले की पांच असेंबली सीट में रहने वाले लोगों के लिए पार्टी ने विशेष जनसभा का भी आयोजन किया है.
इससे पहले बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने उधमपुर में और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भद्रवाह में डॉ जीतेन्द्र सिंह के लिए प्रचार किया था.
कठुआ में नाराज़ वोटरों को लुभाने के लिए भाजपा ने पार्टी में अभी-अभी शामिल हुए क्रिकेटर गौतम गंभीर को भी मैदान में उतारा था. उन्होंने रामनगर और नागरी में रैली कर डॉ सिंह के लिए वोट मांगे थे.
पिछले साल जनवरी में कठुआ के रसाना इलाक़े में बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखने वाली एक आठ साल की बच्ची का पहले अपहरण हुआ और अपहरण के सात दिन बाद बच्ची का शव इलाक़े के एक जंगल के पास मिला.
पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपने आरोपपत्र में दावा किया था कि बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गयी थी.
आरोपपत्र में ये भी कहा गया था कि बलात्कार और हत्या से पहले उसे नशीली दवाएं खिलाई गई थीं और जिसके बाद बच्ची को इलाक़े के एक मंदिर में बंधक बना कर रखा गया था.
पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को ग़िरफ़्तार किया जो अब जेल में हैं. क्राइम ब्रांच ने कहा था कि इस पूरी साज़िश के मास्टरमाइंड सांझी राम जिन्हें ग़िरफ़्तार कर लिया गया था. इस मामले का ट्रायल अभी पंजाब के पठानकोट में चल रहा है.
पिछले साल अप्रैल में मामले की सुनवाई कठुआ की एक अदालत में शुरू हुई थी. लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस को पठानकोट ट्रांसफर किया गया था.
बकरवाल समुदाय की आठ साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार और मर्डर के मामले में उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग को लेकर स्थानीय लोग महीनों कूटा मोड़ पर धरने पर बैठे रहे लेकिन आज भी मामले की सीबीआई जांच करवाए जाने की मांग पूरी नहीं की जा सकी है.
आज कूटा का चौराहा बिल्कुल सुनसान पड़ा है. वहां दिन भर में कई मुसाफिर थोड़ी देर बैठ कर आगे निकल जाते है.
आसपास के दुकानदारों ने बीबीसी हिंदी से बताया की रसाना गाँव के लोग भाजपा से नाराज़ जरूर हैं लेकिन वो यह भी जानते हैं केंद्र की सरकार चुनने के लिए प्रधानमंत्री का चयन करना बड़ा जरूरी है. इसलिए वो अपना वोट नरेन्द्र मोदी को देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे लोग डॉ जीतेन्द्र सिंह को अपना वोट नहीं देना चाहते.
कूटा मोड़ पर मिठाई की दूकान चला रहे मुकेश कुमार कहते हैं, "यहां के सब गाँववाले सरकार से नाराज़ हैं. उनकी सीबीआई जांच की मांग पूरी नहीं हुई इसलिए वो भाजपा के उम्मीदवार को वोट न देकर किसी अन्य को वोट देंगे."
परचून की दूकान के मालिक गुलशन कुमार शर्मा का कहना है, "यहां सीबीआई जांच की पूरी नहीं हो सकी जिसके चलते लोगों में रोष है और वो सरकार से नाराज़ हैं."
आज भी गांव वाले भाजपा के 25 पूर्व विधायकों और दोनों सांसदों से नाराज़ हैं.
गांव वालों का कहना है कि रसाना में हुई घटना की वजह से पूरी रियासत में उथल-पुथल मच गयी थी, भाजपा के मंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और जब उस पर भी बात नहीं बनी तो भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार भी टूट गई.
चाय की दूकान हो, गाँव की चौपाल हो या फिर गली-मोहल्ला- हर जगह राजनीति सिर चढ़ कर बोल रही है.
लेकिन जम्मू के कठुआ जिले में पड़ने वाले रसाना और उसके आस पास के गांवों में आज भी सन्नाटा पसरा हुआ है.
दूसरे चरण का चुनाव प्रचार ख़त्म होने में सिर्फ तीन दिन बाकि हैं लेकिन अभी तक गाँव में चुनावी माहौल नज़र नहीं आ रहा.
हम गाँव के अन्दर कदम रखते हैं तो एक अजीब-सी ख़ामोशी हमारा स्वागत करती है.
पूरे गाँव में कहीं भी किसी दीवार पर कोई पोस्टर नहीं है, ना ही किसी नेता के आने की सुगबुगाहट की सुनाई देती है. न तो किसी उम्मीदवार ने अपना पोस्टर चिपकवाया है और न ही कोई नेता वोटरों को लुभाने के लिए गाँव का रुख कर रहा है.
यह गाँव -रसाना- उधमपुर-डोडा लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है. यहां लगभग 16.85 लाख मतदाता 18 अप्रैल को 12 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. ये लोकसभा सीट डोडा, किश्तवार और रामबन के अलावा कठुआ, उधमपुर और रियासी के जिलों तक फैली हुई है.
भाजपा की ओर से डॉ जीतेन्द्र सिंह दूसरी बार यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. रियासत में सदर-इ-रियासत रहे चुके डॉ करण सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के साझा उम्मीदवार के तौर पर यहां से उनके ख़िलाफ़ चुनाव मैदान में डटे हुए हैं.
88 साल की उम्र में डॉ करण सिंह खुद अपने बेटे के लिए जनता के बीच जा कर वोट मांग रहे हैं.
डॉ करण सिंह ने खुद इस सीट पर 1967-1980 के बीच लगातार चार बार जीत हासिल कर लोगों का प्रतिनिधित्व किया है. अपनी हर चुनावी सभा में वो वोटर्स से 'डोगरा अस्मिता' के नाम पर वोट डालने की अपील कर रहे हैं.
डॉ जीतेन्द्र सिंह की राह मुश्किल बनाने के लिए भाजपा से नाराज़ बागी उम्मीदवार लाल सिंह भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.
13 अप्रैल 2018 के दिन उन्होंने मंत्री परिषद से त्यागपत्र दे दिया था और उसके बाद से वो जनता के बीच उनकी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.
वहीं डॉ जीतेन्द्र सिंह के ख़िलाफ़ जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथरस पार्टी के चेयरमैन हर्षदेव सिंह भी चुनाव मैदान में डटे हुए हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में डॉ जीतेन्द्र सिंह ने कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आज़ाद को 60,000 से ज्यादा वोटों से हराया था. लेकिन इस दफ़ा कठुआ जिले के लोगों की नाराज़गी डॉ जीतेन्द्र सिंह को महंगी पड़ सकती है.
डॉ सिंह की स्थिति मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद रविवार के दिन कठुआ में एक बड़ी चुनावी रैली संबोधित किया.
कठुआ जिले की पांच असेंबली सीट में रहने वाले लोगों के लिए पार्टी ने विशेष जनसभा का भी आयोजन किया है.
इससे पहले बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने उधमपुर में और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भद्रवाह में डॉ जीतेन्द्र सिंह के लिए प्रचार किया था.
कठुआ में नाराज़ वोटरों को लुभाने के लिए भाजपा ने पार्टी में अभी-अभी शामिल हुए क्रिकेटर गौतम गंभीर को भी मैदान में उतारा था. उन्होंने रामनगर और नागरी में रैली कर डॉ सिंह के लिए वोट मांगे थे.
पिछले साल जनवरी में कठुआ के रसाना इलाक़े में बकरवाल समुदाय से ताल्लुक रखने वाली एक आठ साल की बच्ची का पहले अपहरण हुआ और अपहरण के सात दिन बाद बच्ची का शव इलाक़े के एक जंगल के पास मिला.
पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपने आरोपपत्र में दावा किया था कि बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गयी थी.
आरोपपत्र में ये भी कहा गया था कि बलात्कार और हत्या से पहले उसे नशीली दवाएं खिलाई गई थीं और जिसके बाद बच्ची को इलाक़े के एक मंदिर में बंधक बना कर रखा गया था.
पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को ग़िरफ़्तार किया जो अब जेल में हैं. क्राइम ब्रांच ने कहा था कि इस पूरी साज़िश के मास्टरमाइंड सांझी राम जिन्हें ग़िरफ़्तार कर लिया गया था. इस मामले का ट्रायल अभी पंजाब के पठानकोट में चल रहा है.
पिछले साल अप्रैल में मामले की सुनवाई कठुआ की एक अदालत में शुरू हुई थी. लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस को पठानकोट ट्रांसफर किया गया था.
बकरवाल समुदाय की आठ साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार और मर्डर के मामले में उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग को लेकर स्थानीय लोग महीनों कूटा मोड़ पर धरने पर बैठे रहे लेकिन आज भी मामले की सीबीआई जांच करवाए जाने की मांग पूरी नहीं की जा सकी है.
आज कूटा का चौराहा बिल्कुल सुनसान पड़ा है. वहां दिन भर में कई मुसाफिर थोड़ी देर बैठ कर आगे निकल जाते है.
आसपास के दुकानदारों ने बीबीसी हिंदी से बताया की रसाना गाँव के लोग भाजपा से नाराज़ जरूर हैं लेकिन वो यह भी जानते हैं केंद्र की सरकार चुनने के लिए प्रधानमंत्री का चयन करना बड़ा जरूरी है. इसलिए वो अपना वोट नरेन्द्र मोदी को देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे लोग डॉ जीतेन्द्र सिंह को अपना वोट नहीं देना चाहते.
कूटा मोड़ पर मिठाई की दूकान चला रहे मुकेश कुमार कहते हैं, "यहां के सब गाँववाले सरकार से नाराज़ हैं. उनकी सीबीआई जांच की मांग पूरी नहीं हुई इसलिए वो भाजपा के उम्मीदवार को वोट न देकर किसी अन्य को वोट देंगे."
परचून की दूकान के मालिक गुलशन कुमार शर्मा का कहना है, "यहां सीबीआई जांच की पूरी नहीं हो सकी जिसके चलते लोगों में रोष है और वो सरकार से नाराज़ हैं."
आज भी गांव वाले भाजपा के 25 पूर्व विधायकों और दोनों सांसदों से नाराज़ हैं.
गांव वालों का कहना है कि रसाना में हुई घटना की वजह से पूरी रियासत में उथल-पुथल मच गयी थी, भाजपा के मंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और जब उस पर भी बात नहीं बनी तो भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार भी टूट गई.
Monday, April 8, 2019
अमरीका-दक्षिण कोरिया में इंटरनेट की स्पीड 20 गुना बढ़ी
दक्षिण कोरिया और अमरीका ने इस हफ़्ते दुनिया की पहली व्यावसायिक 5-जी सेवा की शुरुआत की है.
दक्षिण कोरिया में मोबाइल सेवा देने वाली तीन कंपनियों और अमरीका के शिकागो समेत दो शहरों के कुछ हिस्सों में ये सेवा शुरू हुई है.
इस सेवा को शुरू करते हुए जानकारी दी गई है कि इससे स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करने वालों की क्षमताओं में ख़ासा इजाफा होगा.
दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने बताया है कि गैलेक्सी एस10 5जी स्मार्ट फ़ोन अभी के फ़ोन के मुकाबले 20 गुना स्पीड वाला होगा, जिसकी बिक्री शुक्रवार से शुरू होगी.
फिलहाल कई देश 5जी नेटवर्क बनाने के लिए होड़ कर रहे हैं, जो भविष्य की तकनीक के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा. मसलन चालक विहीन कार तैयार करने में ये उपयोगी साबित होगी.
5जी, मोबाइल इंटरनेट कनेक्टिविटी तकनीक की पांचवीं पीढ़ी है. इससे यूज़र्स को अच्छी डाटा स्पीड मिलेगी और समय कम लगेगा.
ये व्यापक कवरेज और स्थिर नेटवर्क का वादा भी वादा करता है.
ओवम में टेलीविज़न और एंटरटेनमेंट विश्लेषक ने कहा कि आज के 4जी से 5जी की ओर जाना महत्वपूर्ण साबित होगा.
उन्होंने कहा कि 1जी नेटवर्क ने आवाज़ को सक्षम बनाया, 2जी ने टेक्स्ट को, 3जी ने तस्वीरों को और 4जी ने वीडियो प्रसार को समर्थ बनाया है.
वो कहते हैं, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि 4जी से 5जी एक ऐसी छलांग होगी, जो पहले कभी नहीं हुई थी."
और इस छलांग का पहला फायदा होगा पूरे नेटवर्क में विशाल डाटा को ट्रांसफ़र करना. 5जी का मतलब होगा अधिक से अधिक उपकरण बेहतर स्पीड के साथ नेटवर्क में जोड़े जा सकते हैं.
टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी आईडीसी एशिया पेसिफ़िक में वरिष्ठ रिसर्च मैनेजर निखिल बत्रा का कहन है कि मौजूदा 4जी के मुकाबले 5 जी की स्पीड 10 गुना होगी.
शुरू में 5 जी उच्च गुणवत्ता के प्रसारण को सक्षम बनाएगा और लाईव स्पोर्ट्स और क्लाउड गेमिंग में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित होगा.
ओवम के बार्टन कहते हैं कि 5जी से मैपिंग ऐप्स और शॉपिंग अनुभव और बेहतर होंगे. ये बिना ड्राईवर वाली कारों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा.
इसके अलावा दूर से सर्जरी और होलोग्राफ़िक वीडियो कॉल्स को भी और बेहतर बनाने में ये भूमिका निभाएगा.
पूरी दुनिया में 5 जी के ट्रायल हो रहे हैं लेकिन इसका व्यावसायिक उपयोग अब जाकर शुरू हुआ है.
इस हफ़्ते दक्षिण कोरिया के तीन शीर्ष मोबाइल सेवा प्रदाताओं ने 5जी सेवा शुरू की है.
जबकि इसी हफ़्ते अमरीका की टेल्को वेरिज़ोन ने भी दो शहरों में ये सेवा शुरू की है.
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के आईटी एंड मोबाइल कम्युनिकेशन के अध्यक्ष डीजे कोह ने कहा कि एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है जहां अविश्वसनीय स्पीड और 5जी कनेक्टिवीट वास्तविकता होगी.
5जी के बुनियादी ढांचे के केंद्र में सुरक्षा एक बड़ी चिंता रही है, जिसमें चीन की अग्रणी टेलीकॉम कंपनी ख्वावे का नाम भी आता है.
ख्वावे दुनिया में टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. इस कंपनी को विदेशी सरकारों की आलोचनाओं का इसलिए सामना करना पड़ा है क्योंकि इसकी तकनीक को जासूसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने स्थानीय कंपनियों को 5जी के लिए ख्वावे के उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है.
सैद्धांतिक रूप से, संजीदा संचार माध्यमों के लिए महत्वपूर्ण तकनीक पर नियंत्रण का मतलब है कि ख्वावे जैसे ऑपरेटर जासूसी या संचार माध्यमों को बाधित करने की क्षमता हासिल कर सकते हैं.
चूंकि ऑटोमेटिक गाड़ियों से लेकर घरेलू उपकरण तक इंटरनेट से जुड़ जाने पर ये समस्या और बड़ी हो जाती है.
दक्षिण कोरिया में मोबाइल सेवा देने वाली तीन कंपनियों और अमरीका के शिकागो समेत दो शहरों के कुछ हिस्सों में ये सेवा शुरू हुई है.
इस सेवा को शुरू करते हुए जानकारी दी गई है कि इससे स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करने वालों की क्षमताओं में ख़ासा इजाफा होगा.
दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने बताया है कि गैलेक्सी एस10 5जी स्मार्ट फ़ोन अभी के फ़ोन के मुकाबले 20 गुना स्पीड वाला होगा, जिसकी बिक्री शुक्रवार से शुरू होगी.
फिलहाल कई देश 5जी नेटवर्क बनाने के लिए होड़ कर रहे हैं, जो भविष्य की तकनीक के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा. मसलन चालक विहीन कार तैयार करने में ये उपयोगी साबित होगी.
5जी, मोबाइल इंटरनेट कनेक्टिविटी तकनीक की पांचवीं पीढ़ी है. इससे यूज़र्स को अच्छी डाटा स्पीड मिलेगी और समय कम लगेगा.
ये व्यापक कवरेज और स्थिर नेटवर्क का वादा भी वादा करता है.
ओवम में टेलीविज़न और एंटरटेनमेंट विश्लेषक ने कहा कि आज के 4जी से 5जी की ओर जाना महत्वपूर्ण साबित होगा.
उन्होंने कहा कि 1जी नेटवर्क ने आवाज़ को सक्षम बनाया, 2जी ने टेक्स्ट को, 3जी ने तस्वीरों को और 4जी ने वीडियो प्रसार को समर्थ बनाया है.
वो कहते हैं, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि 4जी से 5जी एक ऐसी छलांग होगी, जो पहले कभी नहीं हुई थी."
और इस छलांग का पहला फायदा होगा पूरे नेटवर्क में विशाल डाटा को ट्रांसफ़र करना. 5जी का मतलब होगा अधिक से अधिक उपकरण बेहतर स्पीड के साथ नेटवर्क में जोड़े जा सकते हैं.
टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी आईडीसी एशिया पेसिफ़िक में वरिष्ठ रिसर्च मैनेजर निखिल बत्रा का कहन है कि मौजूदा 4जी के मुकाबले 5 जी की स्पीड 10 गुना होगी.
शुरू में 5 जी उच्च गुणवत्ता के प्रसारण को सक्षम बनाएगा और लाईव स्पोर्ट्स और क्लाउड गेमिंग में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित होगा.
ओवम के बार्टन कहते हैं कि 5जी से मैपिंग ऐप्स और शॉपिंग अनुभव और बेहतर होंगे. ये बिना ड्राईवर वाली कारों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा.
इसके अलावा दूर से सर्जरी और होलोग्राफ़िक वीडियो कॉल्स को भी और बेहतर बनाने में ये भूमिका निभाएगा.
पूरी दुनिया में 5 जी के ट्रायल हो रहे हैं लेकिन इसका व्यावसायिक उपयोग अब जाकर शुरू हुआ है.
इस हफ़्ते दक्षिण कोरिया के तीन शीर्ष मोबाइल सेवा प्रदाताओं ने 5जी सेवा शुरू की है.
जबकि इसी हफ़्ते अमरीका की टेल्को वेरिज़ोन ने भी दो शहरों में ये सेवा शुरू की है.
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के आईटी एंड मोबाइल कम्युनिकेशन के अध्यक्ष डीजे कोह ने कहा कि एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है जहां अविश्वसनीय स्पीड और 5जी कनेक्टिवीट वास्तविकता होगी.
5जी के बुनियादी ढांचे के केंद्र में सुरक्षा एक बड़ी चिंता रही है, जिसमें चीन की अग्रणी टेलीकॉम कंपनी ख्वावे का नाम भी आता है.
ख्वावे दुनिया में टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. इस कंपनी को विदेशी सरकारों की आलोचनाओं का इसलिए सामना करना पड़ा है क्योंकि इसकी तकनीक को जासूसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने स्थानीय कंपनियों को 5जी के लिए ख्वावे के उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है.
सैद्धांतिक रूप से, संजीदा संचार माध्यमों के लिए महत्वपूर्ण तकनीक पर नियंत्रण का मतलब है कि ख्वावे जैसे ऑपरेटर जासूसी या संचार माध्यमों को बाधित करने की क्षमता हासिल कर सकते हैं.
चूंकि ऑटोमेटिक गाड़ियों से लेकर घरेलू उपकरण तक इंटरनेट से जुड़ जाने पर ये समस्या और बड़ी हो जाती है.
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