Tuesday, December 10, 2019

नागरिकता संशोधन विधेयक: अमित शाह की शरणार्थी-घुसपैठिए की परिभाषा कितनी सही?

नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 सोमवार को लोकसभा में पास कर दिया गया.

इस विधेयक पर चर्चा के दौरान 48 सदस्यों ने इस बिल के पक्ष और विपक्ष में बोला था. इसके बाद रात 10 बजे के क़रीब गृह मंत्री अमित शाह ने सभी सवालों के जवाब देने शुरू किए. उन्होंने एक घंटे से अधिक समय तक अपना भाषण दिया.

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज लाखों-करोड़ों शरणार्थियों की यातनाओं को ख़त्म करने वाला दिन है जो नरक का जीवन जी रहे हैं.

शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दो लाख से अधिक शरणार्थी मौजूद हैं.

इनमें तिब्बत, श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, म्यांमार, पाकिस्तान, सोमालिया से आए शरणार्थी शामिल हैं. 2015 में, सीरिया के 39 शरणार्थी भी भारत आए थे.

हालांकि, नए नागरिकता विधेयक में केवल पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों को भारत में नागरिकता देने की बात कही गई है. इन अल्पसंख्यकों में हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के लोग शामिल हैं.

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में राज्य का धर्म इस्लाम माना गया है. इस कारण वहां के अल्पसंख्यकों को न्याय मिलने की उम्मीद कम हो जाती है.

उन्होंने कहा कि 1971 में बांग्लादेश को संविधान में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र माना गया था लेकिन उसके बाद 1977 में राज्य का धर्म इस्लाम माना गया.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई स्टडीज़ में प्रोफ़ेसर संजय भारद्वाज कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं है कि यह तीनों मुस्लिम राष्ट्र हैं लेकिन बांग्लादेश ख़ुद को मुस्लिम होते हुए भी धर्म-निरपेक्ष मानता है.

वो कहते हैं, "इन तीनों राष्ट्रों में सबसे ज़्यादा सॉफ़्ट इस्लाम बांग्लादेश का है लेकिन इस देश के संविधान में 1977 में धर्म-निरपेक्ष शब्द को हटाकर इस्लाम जोड़ दिया गया. 2011 में कोर्ट ने आदेश दिया कि 1971 के संविधान की आत्मा को बचाए रखा जाना चाहिए जिसके बाद इसमें फिर से धर्म-निरपेक्ष जोड़ा गया लेकिन उसने ख़ुद को इस्लामी राष्ट्र ही माना."

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 1950 में दिल्ली में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था और उस समझौते के तहत यह निश्चित किया गया कि भारत और पाकिस्तान अपने-अपने अल्पसंख्यकों का ख़याल रखेंगे. पाकिस्तान ने भारत को विश्वास दिलाया था कि वो अपने यहां हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसियों का ध्यान रखेगा.

इसके बाद उन्होंने कहा कि 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 फ़ीसदी थी और 2011 में यह कम होकर 3.7 फ़ीसदी हो गई.

अमित शाह ने कहा कि 1947 में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की संख्या 22 फ़ीसदी थी और 2011 में यह कम होकर 7.8 फ़ीसदी रह गई जबकि बांग्लादेश 1971 में बना, 1947 से 1971 के बीच वो पूर्वी पाकिस्तान था.

प्रोफ़ेसर संजय भारद्वाज कहते हैं कि गृह मंत्री अमित शाह ने या तो जल्दबाज़ी में या फिर कुल मिलाकर यह आंकड़ा दिया होगा लेकिन 1947 से 1971 की पूरी यात्रा के दौरान पूर्वी पाकिस्तान में सिर्फ़ 15 फ़ीसदी अल्पसंख्यक बचे थे, बांग्लादेश बनने के बाद भी यह संख्या घटती रही और 1991 में वहां सिर्फ़ 10 फ़ीसदी अल्पसंख्यक बचे जबकि 2011 में वहां सिर्फ़ 8 फ़ीसदी अल्पसंख्यक बचे.

वो कहते हैं कि पाकिस्तान में घटते-घटते अब अल्पसंख्यकों की संख्या एक फ़ीसदी तक पहुंच गई है.

प्रोफ़ेसर भारद्वाज कहते हैं कि पाकिस्तान के मुक़ाबले बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय को विकास की दिक्कतें नहीं हैं क्योंकि वो वहां पर ब्रिटिश काल से ज़मींदार और व्यापारिक समुदाय का हिस्सा रहे हैं, विभाजन के बाद भी उनकी आर्थिक स्थिति में कमी नहीं आई लेकिन उनके साथ राजनीतिक दिक्कते हैं, उनके साथ रोज़गार, सुरक्षा और राजनीति में ज़रूर भेदभाव होता है.

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के अंदर 1951 में 84 फ़ीसदी हिंदू थे और 2011 में वो घटकर 79 फ़ीसदी हो गए जबकि बाकी के देशों में वहां के बहुसंख्यकों की संख्या बढ़ी है.

उन्होंने भारत में मुसलमानों की संख्या को भी बताया. अमित शाह ने कहा कि 1951 में भारत में मुसलमानों की संख्या 9.8 फ़ीसदी थी और आज मुसलमानों की संख्या 14.23 फ़ीसदी है.