Monday, November 19, 2018

क्या बिटक्वाइन का जादू ख़त्म हो रहा है?

कुछ वक़्त पहले तक जिस वर्चुअल मुद्रा बिटक्वाइन को मुनाफ़ा कमाने का सबसे सही ज़रिया बताया जाता था, वो अब ढलान पर है.

बिटक्वाइन की क़ीमत पांच हज़ार डॉलर से नीचे आ गई है. अक्टूबर 2017 के बाद बिटक्वाइन की क़ीमत में पहली बार इतनी गिरावट देखी गई है.

इस वजह से सभी बिटक्वाइन की कुल क़ीमत 87 बिलियन डॉलर यानी क़रीब छह लाख करोड़ से नीचे आ गई है.

बिटक्वाइन की एक यूनिट बिटक्वाइन कैश 15 नवंबर को दो तरह की करेंसी में बदल गई. अब ये दोनों एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा में हैं.

कुछ जानकारों ने इस गिरावट के लिए क्रिप्टो करेंसी मार्केट में मची उथल-पुथल को ज़िम्मेदार माना है. बाज़ार की ये हालत डिजिटल ऐसेट्स में गिरावट के चलते हो रही है.

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बिटक्वाइन एक्सचेंज कराकेन ने एक ब्लॉग पोस्ट में बिटक्वाइन कैश के दो नए रूपों को लेकर निवेशकों को आगाह किया है.

कराकेन ने क्रिप्टो करेंसी- बिटक्वाइन SV को 'बेहद जोख़िम भरा निवेश' बताया है.

बीबीसी के तकनीकी संवाददाता रोरी कैलन जोन्स लिखते हैं, ''एक साल पहले 20 हज़ार पर रहने वाला बिटक्वाइन 2018 में छह से सात हज़ार के बीच रहा है.''

अर्थशास्त्री नौरिएल रुबिनी जैसे जानकारों ने पहले ही बिटक्वाइव के दिन ढलने की भविष्यवाणी कर दी थी. लेकिन तब बिटक्वाइन की ऊंची कीमतों से उत्साह में भरे निवेशकों को लगता था कि वो इस निवेश के ज़रिए चांद तक अपनी लैंबॉर्गिनी ले जा सकेंगे.

लेकिन अब बिटक्वाइन की हालत खस्ता होने की ओर है. हालांकि बाज़ार के उतार-चढ़ाव के लिए वजह सिर्फ़ एक ही नहीं होती है, लेकिन बिटक्वाइन की मौजूदा हालत का इल्ज़ाम बिटक्वाइन कैश की नई किस्मों पर आ सकता है.

बिटक्वाइन की क़ीमत बीते हफ़्ते में ही क़रीब 50 फ़ीसदी नीचे गिरी थी. इसमें कुछ बातों को समझना बेहद ज़रूरी है.

शुरुआत में कहा गया था कि 21 मिलियन से ज़्यादा बिटक्वाइन नहीं हो सकते हैं, जिसे पुख़्ता और स्थायी करेंसी माना जा सकता है.

लेकिन किसी ने भी इस पर ग़ौर नहीं किया कि अगर आप एक क्रिप्टो करेंसी की शुरुआत करेंगे तो कई नई दर्जनों क्रिप्टो करेंसीज़ की शुरुआत हो सकती है.

इसके नतीजे में बाज़ार को उथल-पुथल का सामना करना पड़ सकता है.

Sunday, November 18, 2018

एक किलोग्राम अब एक किलोग्राम नहीं रहा

वैज्ञानिकों ने किलोग्राम की परिभाषा बदल दी है. नई परिभाषा को 50 से ज़्यादा देशों ने सर्वसम्मति से मंजूरी भी दे दी है.

वर्तमान में इसे प्लेटिनम से बनी एक सिल के वज़न से परिभाषित किया जाता है जिसे 'ली ग्रैंड के' कहा जाता है. ऐसी एक सिल पश्चिमी पेरिस में इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ़ वेट्स एंड मेज़र्स (बीआईपीएम) के पास साल 1889 से बंद है.

फ़्रांस के वर्साइल्स में 'वेट एंड मेज़र्स' पर एक बड़ा सम्मलेन आयोजित किया गया था जिसमें कई वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया था.

इसमें किलोग्राम की परिभाषा बदलने के लिए वोट किया गया जिसके बाद इस फ़ैसले पर मुहर लगा दी गई.

ज़्यादातर वैज्ञानिकों का पक्ष था कि किलोग्राम को यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा के आधार पर परिभाषित किया जाए.

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हालांकि, यूके में नेशनल फ़िज़िकल लैबोरेट्री की वैज्ञानिक पेर्डी विलियम्स ने इसके बारे में मिलीजुली राय ज़ाहिर की.

वो कहती हैं, "मैं लंबे वक्त से इस प्रोजेक्ट के साथ नहीं जुड़ी हूं और मैं किलोग्राम का माप पसंद करती हूं. लेकिन ये अपने आप में महत्वपूर्ण पल है और मैं एक अच्छा कदम है. ये नया तरीका बेहतर तरीके से काम करेगा."

जो बदलाव हुआ है वो लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित नहीं करेगा. लेकिन, उद्योग और विज्ञान में इसका व्यावहारिक प्रयोग होने की उम्मीद है क्योंकि यहाँ सटीक माप होने की आवश्यकता होती है.

अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली में किलो सात बेसिक यूनिट्स में से एक है.

उनमें से चार हैं- किलो, एंपियर (विद्युत प्रवाह), केल्विन (ताप) और मोल (पार्टिकल नंबर). किलोग्राम अंतिम एसआई बेस यूनिट है जो अभी तक एक फ़िज़ीकल ऑब्ज़ेक्ट द्वारा परिभाषित है.

'ली ग्रैंड के' लंदन में निर्मित 90 प्रतिशत प्लेटिनम और दस प्रतिशत इरिडियम से बना 4 सेंटीमीटर का एक सिलेंडर है, जो पश्चिमी पेरिस के सीमांत सेवरे में इंटरनेश्नल ब्यूरो ऑफ़ वेट्स एंड मेजर्स (बीआईपीएम) के वॉल्ट में साल 1889 से बंद है.

क्योंकि फ़िज़ीकल ऑब्ज़ेक्ट आसानी से परमाणु को खो सकते हैं या हवा से अणुओं को अवशोषित कर सकते हैं, इसी कारण इसकी मात्रा माइक्रोग्राम में दसियों बार बदली गई थी.

इसका मतलब है कि किलोग्राम और स्तर मापने के लिए दुनिया भर में प्रोटोटाइप का उपयोग किया जाता है, जो कि एकदम सही अशुद्धि बताता है.

सामान्य जीवन में इस तरह के मामूली बदलाव दिखाई भी नहीं देते, लेकिन एकदम सटीक वैज्ञानिक गणनाओं के लिए ये एक बड़ी समस्या रही है.

Friday, November 16, 2018

23 लोगों की मौत, 81 हजार राहत शिविरों में

चक्रवाती तूफान गाजा गुरुवार देर रात तमिलनाडु के नागपट्टनम और वेदरन्नियम तट से टकराया। इस दौरान तूफानी हवाओं की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा रही। गाजा के असर से कई जिलों में भारी बारिश हो रही है। मुख्यमंत्री पलानीसामी ने बताया कि हादसों में 23 लोगों की मौत हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने 81 हजार लोगों को तटीय इलाकों से हटाकर 471 राहत शिविरों में भेजा है। मौसम विभाग ने शुक्रवार शाम तक तूफान के कमजोर पड़ने का अनुमान जताया है।

तेज हवाओं और बारिश की वजह से बिजली के खंभे और पेड़ उखड़ गए। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। तटीय इलाकों के घरों को भी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने मदद के लिए एनडीआरएफ की नौ टीमें प्रभावित इलाके में तैनात की हैं। गुरुवार-शुक्रवार को एहतियातन सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई।

कोड्डालुरु समेत कई शहरों में भारी बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक, तमिलनाडु के तटीय शहरों- कोड्डालुरु, नागपट्टनम, थोंडी, पंबान और पुड्डुचेरी के कराईकल में सुबह तक आठ सेंटीमीटर तक बारिश हुई। तूतिकोरिन और रामनाथपुरम में भी भारी बारिश हो रही है। तिरुवरूर जिले के कई शहरों में पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। नागपट्टनम और कराईकल जिले में भी सड़क पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ।

मृतकों के परिजन को 10-10 लाख की मदद
पड्डुकोट्टाई जिले में एक मकान ढहने से चार युवकों की मौत हो गई, तीन महिलाएं जख्मी हुईं। तंजावुर में 10 और तिरुवरूर में 4, पुडुकोट्टाई में तीन, त्रिची में दो ,नागापट्टनम, कुड्डालोर और तिरूवानामलाई में एक-एक लोगों की जान गई। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवार को 10-10 लाख की मदद देने का ऐलान किया। तूफान से हुए नुकसान की जानकारी जुटाई जा रही है।

14 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ा चक्रवात
मौसम विभाग ने गुरुवार को कहा था कि गाजा चक्रवात 14 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ा। तमिलनाडु, दक्षिणी आंध्र और पुड्डुचेरी तट पर ऊंची लहरें उठने की आशंका है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई।

तमिलनाडु में एनडीआरएफ की नौ और पुड्डुचेरी में दो टीमें तैनात है। इसके अलावा 31 हजार बचाव कर्मियों और एसडीआरएफ को भी स्टैंडबाई पर रखा है, ताकि आपात स्थिति में उनकी मदद ली जा सके।

परीक्षाएं रद्द, स्कूल-कॉलेज बंद रखे गए
अन्ना यूनिवर्सिटी ने अपनी सेमेस्टर परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। वहीं, टेक्निकल डिप्लोमा कोर्स की परीक्षाओं की तारीख 24 नवंबर तक बढ़ाई गई है। राज्य के तंजावुर, तिरुवरूर, नागपट्टनम, रामनाथपुरम, पड्डुकोट्टाई और पुड्डुचेरी के कराईकल जिले में स्कूल-कॉलेज बंद रखे गए।

Tuesday, November 6, 2018

काशी पहुंच 'गायब' तेज प्रताप बोले, 'मैं नहीं पूरा मीडिया गायब हो गया है'

अपने परिवार और पत्नी से रूठे तेज प्रताप यादव आखिरकार वाराणसी में मिले। तेज प्रताप यादव यहां बाबा विश्वनाथ मंदिर के दर्शन भी करेंगे। बोधगया के होटेल से सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर वह गायब हो गए थे।

वाराणसी
आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद यादव के नाराज बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अपने घर बिहार के पटना से काफी दूर यूपी के वाराणसी पहुंच गए हैं। बता दें कि तेज मंगलवार सुबह से बोधगया में होटेल के कमरे से अचानक गायब बताए जा रहे थे। वह कहां गए, इसकी भनक उनके सुरक्षाकर्मियों को भी नहीं थी। पहले बताया जा रहा था कि तेज प्रताप वृंदावन गए हैं। 

हालांकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि तेज प्रताप यादव भगवान भोलेनाथ की नगरी वाराणसी में हैं। वह यहां पर बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन भी करेंगे। वृंदावन चले जाने की खबर पर तेज प्रताप यादव ने कहा है कि वह नहीं पूरी मीडिया गायब हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'आपसे कोई पूछता है कि आप कहां जाते हैं, क्या करते हैं। इसकी जानकारी कोई नहीं लेता है तो फिर हमसे क्यों पूछ रहे हैं?' उन्होंने स्पष्ट कहा है कि हम गायब नहीं हुए हैं। पूरी मीडिया गायब हो गई है। उन्होंने कहा कि वह बाबा विश्वनाथ की पूजा करने काशी आए हैं। 

पिछले दिनों पत्नी ऐश्वर्या से तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद तेज प्रताप सुर्खियों में आए थे। इसके बाद वह रांची जेल में बंद पिता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करने गए थे। रांची से तेज प्रताप को पटना वापस लौटना था जहां उनका परिवार और पत्नी ऐश्वर्या इंतजार में थे लेकिन तेज प्रताप बोधगया में ही रुक गए। फिर यहां से वह वाराणसी के लिए कब निकले, इस बात की किसी को कानोंकान खबर तक नहीं हुई।

इसका यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि तेज प्रताप खुद ही सुलह के मूड में नहीं हैं। आपको बता दें कि तेज ने गुरुवार को तलाक की अर्जी परिवार न्यायालय में दायर की थी। पिता लालू प्रसाद की बात न मानने के सवाल पर तेज ने कहा, 'पापा मेरी बात मान रहे हैं, जो हम उनकी बातें मान लें। मेरे ममी-पापा, भाई-बहन सभी ऐश्वर्या का साथ दे रहे हैं।'

...तो क्या इस वजह से आई तलाक की नौबत? 
मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का भी जिक्र है कि ऐश्वर्या अपने पिता चंद्रिका प्रसाद राय को सारण लोकसभा सीट से टिकट दिलाना चाहती थीं। इसके लिए वह लगातार तेज प्रताप पर दबाव बना रही थीं। तेज प्रताप का आरोप यह भी है कि ऐश्वर्या हनीमून मनाने के लिए इंडोनेशिया के बाली जाना चाहती थीं लेकिन धार्मिक प्रवृत्ति की वजह से वह वहां जाने के पक्ष में नहीं थे। 

जानिए, कौन हैं ऐश्वर्या राय 
ऐश्वर्या राय आरजेडी नेता चंद्रिका राय की पुत्री हैं। तेज प्रताप यादव ने ऐश्वर्या राय से 12 मई को विवाह किया था। राय के दादा दरोगा राय 1970 के दशक के शुरू में थोड़े समय के लिए बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। तेज प्रताप ने शनिवार को लालू यादव से रांची के राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में दो घंटे से अधिक समय तक मुलाकात की। वहां लालू चारा घोटाला मामले में बंद हैं। 

Thursday, November 1, 2018

मुस्लिम देशः कहां क्या है ईशनिंदा क़ानून

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई महिला आसिया बीबी को ईशनिंदा के एक मामले में बरी कर दिया है.

निचली अदालत और फिर हाई कोर्ट ने इस मामले में आसिया बीबी को मौत की सज़ा सुनाई थी.

उसी सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की सुनवाई करते हुए अदालत ने आसिया बीबी को अब बरी कर दिया है.

फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस मियां साक़िब निसार ने कहा कि वो हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट के फ़ैसलों को रद्द करते हैं.

आसिया पर उनके पड़ोस में रहनेवाली महिलाओं ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के आरोप लगाए थे.

अदालत के इस फ़ैसले के बाद पाकिस्तान में एक बार फ़िर तौहीन-ए-रिसालत यानी ईशनिंदा क़ानून पर बहस तेज़ हो गई है.

साल 1990 के बाद से अब तक पाकिस्तान में भीड़ या लोगों ने ईशनिंदा का आरोप लगाकर कम से कम 69 लोगों की हत्या कर दी है.

अलग-अलग संस्थानों से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में इस समय 40 लोग ईशनिंदा के क़ानून के तहत दोषी क़रार दिए जाने के बाद या तो मौत की सज़ा का इंतज़ार कर रहे हैं या उम्रक़ैद काट रहे हैं.

पाकिस्तान में निचली अदालतों में आए सैकड़ों मामलों में ईश-निंदा के लिए लोगों को सज़ा सुनाई गई लेकिन हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव, छानबीन की प्रक्रिया में कमी या शिकायतकर्ता की गलत मंशा को देखते हुए फैसलों को पलट दिया. इसमें से सैकड़ों ईसाई हैं जिनपर आरोप लगाए गए हैं.

कई देशों में ईशनिंदा क़ानून
लेकिन पाकिस्तान दुनिया का ऐसा अकेला देश नहीं है जहां ईशनिंदा को लेकर क़ानून हैं. शोध संस्थान प्यू रिसर्च की ओर से साल 2015 में जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 26 फ़ीसदी देशों में धर्म के अपमान से जुड़े क़ानून हैं जिनके तहत सज़ा के प्रावधान हैं. इनमें से 70 फ़ीसदी देश मुस्लिम बहुल है.

इन देशों में ईशनिंदा के आरोप के तहत जुर्माना और क़ैद की सज़ा के प्रावधान हैं लेकिन सऊदी अरब, ईरान और पाकिस्तान में इस अपराध में मौत तक की सज़ा का प्रावधान है.

एक नज़र ऐसे चुनिंदा देशों पर जहां ईशनिंदा से जुड़े क़ानून हैं.

ईशनिंदा क़ानून: क्या पाकिस्तान बनने की राह पर है पंजाब?

पाकिस्तान की वो महिला जिसे 'प्यास की वजह से' मिल सकती है मौत की सज़ा

पाकिस्तान

धर्म से संबंधित आपराधिक मामलों को सबसे पहले ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1860 में संहिताबद्ध किया गया था और इसमें वर्ष 1927 में विस्तार किया गया.

विभाजन के बाद पाकिस्तान ने इसे अपना लिया.

पाकिस्तान में ज़िया-उल हक़ की सैन्य सरकार के दौरान 1980 से 86 के बीच इसमें और धाराएं शामिल की गईं. वे उनका इस्लामीकरण करना चाहते थे और वर्ष 1973 में अहमदी समुदाय को ग़ैर-मुस्लिम समुदाय घोषित किया गया था और वो इसे क़ानूनी तौर पर अलग करना चाहते थे.

ब्रितानी शासनकाल के दौरान बनाया गया ये आम क़ानून था. इसके तहत अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी पूजा करने की वस्तु या जगह को नुकसान या फिर धार्मिक सभा में खलल डालता है तो उसे दंड दिया जाएगा. साथ ही अगर कोई किसी की धार्मिक भावनाओं का अपमान बोलकर या लिखकर या कुछ दृष्यों से करता है तो वो भी गैरक़ानूनी माना गया.

इस क़ानून के तहत एक से 10 साल तक की सज़ा दी सकती थी जिसमें जुर्माना भी लगाया जा सकता था. वर्ष 1980 की शुरुआत में पाकिस्तान की दंड संहिता में धार्मिक मामलों से संबंधित अपराधों में कई धाराएं जोड़ दी गईं.

इन धाराओं को दो भागों में बांटा गया- जिसमें पहला अहमदी विरोधी क़ानून और दूसरा ईशनिंदा क़ानून शामिल किया गया.

अहमदी विरोधी क़ानून 1984 में शामिल गया था. इस क़ानून के तहत अहमदियों को खुद को मुस्लिम या उन जैसा बर्ताव करने और उनके धर्म का पालन करने पर प्रतिबंध था.

ईशनिंदा क़ानून को कई चरणों में बनाया गया और उसका विस्तार किया गया. वर्ष 1980 में एक धारा में कहा गया कि अगर कोई इस्लामी व्यक्ति के खिलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करता है तो उसे तीन साल तक की जेल हो सकती है.

वहीं वर्ष 1982 में एक और धारा में कहा गया कि अगर कोई व्यक्ति कुरान को अपवित्र करता है तो उसे उम्रकैद की सज़ा दी जाएगी. वर्ष 1986 में अलग धारा जोड़ी गई जिसमें ये कहा गया कि पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ ईशनिंदा के लिए दंडित करने का प्रावधान किया गया और मौत या उम्र कैद की सज़ा की सिफारिश की गई.