Sunday, December 16, 2018

कमलनाथ, संजय गांधी से दोस्ती से लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने तक

मध्य प्रदेश कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से भी जानकारी दी गई है कि कांग्रेस कमेटी के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ को मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया है.

इस तरह से राज्य में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर दो दिनों से चला आ रहा चर्चाओं और क़यासों का दौर थम गया है.

इससे पहले दिन में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाक़ात की थी और फिर भोपाल रवाना हो गए थे.

मज़बूत थी कमलनाथ की दावेदारी
इससे पहले 11 दिसंबर की शाम को छह बजे तक मध्य प्रदेश में मुक़ाबला बराबरी का दिख रहा था तब न्यूज़रूम में ये क़यास लगाए जाने लगे थे कि हो सकता है कि यहां बीजेपी अपनी सरकार बचा ले जाए.

शिवराज सिंह चौहान के विश्वस्त मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता को फ़ोन मिलाया तो उन्होंने कहा- बाग़ियों से थोड़ा नुक़सान हो रहा है, लेकिन सरकार बना लेंगे हम लोग. थोड़े कम भी हुए भी तो हो जाएगी व्यवस्था.

फिर कांग्रेस ख़ेमे का हाल जानने के लिए कांग्रेस की राजनीति की नब्ज़ रखने के साथ कमलनाथ को नज़दीक से जानने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार को फ़ोन मिलाया तो उन्होंने कहा - बीजेपी के कुछ नेताओं को मालूम नहीं है कि उनका पाला इस बार कमलनाथ से पड़ा है, अगर बीजेपी अपने दम पर बहुमत से कम हुई तो सरकार नहीं बना पाएगी.

पहले देर रात राज्यपाल को भेजे ईमेल और आदमी के हाथ से भेजे गए सरकार बनाने के दावे (ध्यान रहे कि कमलनाथ ने फ़ैक्स करने का विकल्प चुना ही नहीं, जिसके चलते महबूबा मुफ्ती जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाते बनाते रह गई थीं) और अगली सुबह राज्यपाल को भेजे गए कुल 121 विधायकों के समर्थन ने साफ़ कर दिया कि 71 साल की उम्र के कमलनाथ हर उस रणनीति के मास्टर हैं जिसकी झलक पिछले कुछ सालों से कांग्रेस में नहीं दिख रही थी.

राज्यपाल को भेजे गए समर्थन वाले पत्र से साफ़ है कि बीजेपी के 109 विधायकों को छोड़ दें तो बाक़ी सब के सब कमलनाथ के साथ हैं. इससे पहले बीजेपी विधायक दल की बैठक भी हुई जिसमें हर ज़ोर आज़माइश के बाद यही नतीजा निकला कि मैजिक नंबर नहीं मिल पाएगा.

सात महीने में कमल का कमाल
मध्य प्रदेश की राजनीति को नज़दीक से देखने वाले कई विश्लेषक ये दावा करने में जुट गए हैं कि ये करिश्मा मौजूदा समय में मध्यप्रदेश में केवल और केवल कमलनाथ के बूते की बात थी, जो उन्होंने कर दिखाया.

महज़ सात महीने पहले उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रभार संभाला और इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक के गढ़ और हिंदुत्व की राजनीति के केंद्र रहे मध्य प्रदेश में नरेंद्र मोदी-अमित शाह की रणनीति के साथ साथ लोकलुभावन नीतियों के चलते बेहद लोकप्रिय शिवराज सिंह चौहान की हवा निकाल दी.

ये काम उन्होंने तब किया जब मध्य प्रदेश कांग्रेस बीते कई दशकों से गुटबाज़ी के चलते एक दूसरे की टांग खींचने की परिपाटी रही है. कमलनाथ को नज़दीक से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता कहते हैं- कमलनाथ की यही ख़ासियत रही है, वो सबको साथ लेकर चलना जानते हैं, रिज़ल्ट देना जानते हैं.

No comments:

Post a Comment