बसपा सुप्रीमो मायावती ने नरेंद्र मोदी सरकार के गरीब सवर्णों को दस फ़ीसदी आरक्षण दिए जाने के फ़ैसले का स्वागत किया है.
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले लिया गया ये फ़ैसला हमें सही नीयत से लिया गया फ़ैसला नहीं लगता है, चुनावी स्टंट लगता है, राजनीतिक छलावा लगता है.
मायावती ने कहा, "अच्छा होता अगर भाजपा अपना कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले नहीं बल्कि और पहले ये फ़ैसला ले लेती."
देश में अब एससी-एसटी और ओबीसी वर्गों को मिलने वाले आरक्षण की लगभग 50 फीसदी सीमा की सही नीयत के साथ भी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है.
और इन्हें उनकी बढ़ी हुई आबादी के अनुपात में आरक्षण के अनुपात को भी पूरे तौर पर बढ़ा कर दिए जाने की कोई नई संवैधानिक व्यवस्था देश में लागू की जानी चाहिए.
सवर्ण जातियों को आरक्षण देने के फ़ैसले से देश के अलग-अलग राज्यों में चले तीन जातीय आंदोलनों का भी फ़ौरी तौर पर तो शमन हो जाएगा.
गुजरात में पाटीदार आंदोलन, महाराष्ट्र में मराठा और हरियाणा में जाट आंदोलन ने सरकार के लिए बहुत मुश्किल खड़ी कर दी थी.
इत्तफ़ाक़ से तीनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसलिए बात सीधे मोदी तक पहुंचती थी. ये तीनों जातियां पिछड़े वर्ग के कोटे में आरक्षण की मांग कर रही थीं.
उनकी मांग का समर्थन करना पिछड़ों की नाराज़गी का सबब बन सकता था. आरक्षण की सीमा 49.5 फ़ीसदी से बढ़ाकर 59.5 फीसदी करने से किसी से कुछ छीना नहीं जा रहा, इसलिए दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों में अगड़ों को मिलने वाले आरक्षण से कोई नाराज़गी नहीं होगी.
साथ ही सवर्णों में आर्थिक रूप से कमज़ोर तबक़े की शिकायत भी दूर होगी. उसे लगता था कि केवल जाति के कारण उसकी ग़रीबी को ग़रीबी नहीं माना जाता.
मोदी सरकार के इस क़दम से अगड़ी जातियों में पूरी आरक्षण व्यवस्था को लेकर पनप रहे अंसतोष पर थोड़ा पानी पड़ेगा.
इसलिए जातीय वैमनस्य की जो कटुता समाज में दिख रही थी वह थोड़ी तो कम होगी ही.
भाजपा के अंदर भी सवर्णों के एक वर्ग को इस बात का गिला था कि प्रधानमंत्री हर समय पिछड़ों और दलितों की बात करते हैं. सवर्णों के वोट भाजपा को मिलते हैं पर पार्टी और सरकार उनके बारे में कुछ सोचती नहीं.
यह एक नये तरह की सोशल इंजीनीयरिंग है. जिसमें एक वर्ग को कुछ मिलने से दूसरा वर्ग नाराज़ नहीं हो रहा है.
अब संसद में इस मुद्दे पर जिस तरह की राजनीतिक गोलबंदी बनेगी वह काफ़ी हद तक लोकसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण भी तय करेगी.
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